दीपू चंद्र दास हत्या: बांग्लादेश में हिंदुओं का नरसंहार, 50 साल में आधी आबादी गायब
बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और भेदभाव का सिलसिला कोई नया नहीं है, लेकिन दिसंबर 2025 में दिप्पु चंद्र दास नामक एक 25 वर्षीय हिंदु युवक को भीड़ द्वारा जलाकर मार देने की घटना ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। यह घटना केवल एक अलग-थलग वारदात नहीं है, बल्कि बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ व्यवस्थित उत्पीड़न, भेदभाव और सामूहिक हिंसा की एक लंबी श्रृंखला का सबसे भयानक अध्याय है। इस ब्लॉग पोस्ट में हम बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ होने वाली हिंसा का संपूर्ण इतिहास, कारण, और वर्तमान परिस्थितियों को विस्तार से समझेंगे।
दिप्पु चंद्र दास की हत्या: नवंबर 2024 की सबसे भयानक घटना
यह क्या हुआ?
18 दिसंबर 2024 की रात को बांग्लादेश के मेमसिंह जिले के भालुका उपजिले में एक भयानक घटना घटी। एक स्थानीय गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले 25 वर्षीय दिप्पु चंद्र दास को धर्मनिंदा (ब्लासफेमी) का आरोप लगाकर एक भीड़ ने पकड़ा और उसे मारपीट करने लगी। फैक्ट्री के फर्श इन-चार्ज अलमगीर हुसैन के अनुसार, दिप्पु के खिलाफ एक अफवाह फैल गई कि उसने फेसबुक पर पैगंबर मुहम्मद के बारे में अपमानजनक बातें कही हैं। यह अफवाह बिना किसी ठोस सबूत के फैलाई गई थी।
भीड़ की हिंसा इतनी जबरदस्त हो गई कि फैक्ट्री प्रबंधन को दिप्पु को बाहर निकालने के लिए मजबूर होना पड़ा ताकि फैक्ट्री की संपत्ति सुरक्षित रहे। बाहर निकलते ही भीड़ ने उसे पकड़कर डंडों और अन्य हथियारों से मारपीट शुरू कर दी। फिर जो हुआ वह अमानवीय था - भीड़ ने दिप्पु की लाश को धाका-मेमसिंह हाईवे पर एक पेड़ से लटकाया और उसे आग लगा दी। पूरी घटना को वीडियो में रिकॉर्ड किया गया और सोशल मीडिया पर वायरल किया गया।
जांच में क्या निकला?
यहाँ सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच में पता चला कि दिप्पु चंद्र दास ने कोई अपमानजनक बयान नहीं दिया था। अधिकारियों के अनुसार, फेसबुक पर ऐसी कोई पोस्ट नहीं मिली जिससे साबित हो सके कि दिप्पु ने धर्म की निंदा की हो। यह साफ संकेत देता है कि यह हत्या एक पूर्वनियोजित सामूहिक हिंसा थी, जहाँ एक युवा हिंदु को बस उसके धर्म के कारण निर्दोषता के साथ मार दिया गया।
दिप्पु के पिता राविलाल ने अपनी पीड़ा को साझा करते हुए कहा: "हमने फेसबुक पर देखा। वहाँ से खबर फैल गई... मुझे बताया गया कि भीड़ ने मेरे बेटे को एक पेड़ से बांधा। फिर भीड़ ने केरोसीन डाला और आग लगा दी। उसकी जली हुई लाश को बाहर छोड़ दिया। उसके जले हुए धड़ और सिर को बाहर बांध दिया। यह भयानक था।"
सरकारी प्रतिक्रिया
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार, जिसका नेतृत्व नोबल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस कर रहे हैं, ने इस घटना की निंदा की। सरकार के कार्यालय की ओर से कहा गया: "हम मेमसिंह में एक हिंदु व्यक्ति की हत्या की खुलकर निंदा करते हैं। नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। इस जघन्य अपराध के अपराधियों को नहीं छोड़ा जाएगा।" पुलिस ने इस घटना में 10 लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन न्याय अभी लंबा सफर है।
बांग्लादेश में हिंदु आबादी में गिरावट: एक आंकड़ों की कहानी
जनसंख्या का भयावह सिकुड़ना
बांग्लादेश में हिंदु आबादी का इतिहास एक त्रासदी की कहानी है। 2022 की जनगणना के अनुसार, बांग्लादेश की कुल जनसंख्या का मात्र 8% हिंदु हैं। यह आंकड़ा अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। 1971 में बांग्लादेश आजाद हुआ, तब देश की आबादी में हिंदुओं की संख्या 15-20% के बीच थी। मात्र 50 वर्षों में यह संख्या आधी हो गई है। यह केवल प्राकृतिक जनसंख्या वृद्धि नहीं है, बल्कि एक व्यवस्थित और सुनियोजित भेदभाव, हिंसा और सामाजिक दबाव का परिणाम है।
1947 में भारत के विभाजन के समय, जो अभी पाकिस्तान था, वह अब बांग्लादेश है, यहाँ हिंदुओं की संख्या कुल जनसंख्या का 22% थी। विभाजन के बाद, लाखों हिंदु भारत आ गए, लेकिन कई वापस नहीं आ सके क्योंकि उन्हें संपत्ति पर सरकार का आरोप था। फिर 1971 का बांग्लादेश मुक्ति संग्राम आया, जिसमें पाकिस्तानी सेना और उसके सहयोगियों ने हिंदुओं को विशेष रूप से निशाना बनाया।
बांग्लादेश में हिंदु उत्पीड़न का ऐतिहासिक संदर्भ
1971 का महाकाश्य: बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में हिंदुओं का संहार
1971 में जब बांग्लादेश आजाद हुआ, तो वह घटनाएं जो पाकिस्तानी सेना ने अंजाम दीं, वे इतिहास के सबसे भयानक नरसंहारों में से एक हैं। पाकिस्तानी सेना ने हिंदुओं को विशेष रूप से निशाना बनाया था। अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के अनुसार, पाकिस्तानी सेना के जनरल याहया खान ने कहा था: "30 लाख को मार दो, बाकी हमारे हाथ की मुट्ठी में होंगे।"
पाकिस्तानी सेना गांवों में जाती थी और पहले पूछती थी कि हिंदु कहाँ रहते हैं, फिर उन इलाकों को जला देती थी। हिंदुओं को उनके धर्म के आधार पर पहचाना जाता था - खतना के संकेतों से या इस्लामिक प्रार्थना को दोहराने की क्षमता से। इस महान स्वतंत्रता संग्राम में कुल 30 लाख लोग मारे गए, जिनमें 60% से अधिक हिंदु थे। बांग्लादेश में आने वाले भारतीय शरणार्थियों में से 80-90% हिंदु थे।
1992: बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद का दंगे
1992 में जब भारत में बाबरी मस्जिद को विध्वंस किया गया, तो बांग्लादेश में इसका प्रतिक्रिया हिंदुओं के विरुद्ध हिंसा के रूप में हुई। मार्च 1992 से 1993 तक, बांग्लादेश के कई शहरों में हिंदु मंदिरों पर हमले हुए, हिंदु घरों को जलाया गया, और हिंदु व्यवसायों को लूटा गया। ढाका के धाकेश्वरी मंदिर को हमला किया गया और जलाया गया। कॉक्स बाजार के कुतुबदिया उपजिले में 14 हिंदु मंदिरों पर हमले हुए, जिनमें 8 को पूरी तरह जला दिया गया।
2001: चुनावों के बाद सामूहिक हिंसा
2001 के बांग्लादेशी आम चुनाव में अवामी लीग को हार का सामना करना पड़ा और बांग्लादेश राष्ट्रवादी दल (बीएनपी) की जीत हुई। इसके बाद चुनाव-संबंधी हिंसा हुई, जिसमें हिंदु विशेष लक्ष्य बन गए। आरोप यह था कि हिंदु अवामी लीग के समर्थक थे। बिहार के भोला जिले के चर फ्যासन उपजिले में 600 हिंदु महिलाओं का सामूहिक बलात्कार किया गया। यह घटना इतनी भयानक थी कि इसे 'चर फ्যासन बलात्कार कांड' के नाम से जाना जाता है।
2001 में कुल 18,000 से अधिक हिंसा की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें हत्या, बलात्कार, संपत्ति की लूटपाट और घरों को जलाना शामिल था। पूरी दक्षिण-पश्चिम बांग्लादेश, जहाँ बड़ी हिंदु आबादी थी, वह एक युद्ध क्षेत्र बन गया।
2013: अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण की फांसी और जमात-ई-इस्लामी की हिंसा
2013 में अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने जमात-ई-इस्लामी के उप-अध्यक्ष देलवार हुसैन सईदी को 1971 के युद्ध अपराधों के लिए मृत्युदंड की सजा सुनाई। इसके बाद जमात-ई-इस्लामी और उसके छात्र संगठन 'इस्लामी छात्र शिबिर' ने बांग्लादेश के विभिन्न भागों में हिंदुओं के विरुद्ध सामूहिक हिंसा की।
28 फरवरी 2013 से शुरू होकर कई हफ्तों तक हिंसा चलती रही। 50 से अधिक हिंदु मंदिरों को तोड़ा गया और 1,500 से अधिक हिंदु घर व्यवसायों को जला दिया गया। सबसे भयानक बात यह थी कि मानवाधिकार संगठन 'एमनेस्टी इंटरनेशनल' को कई उत्तरजीवियों ने बताया कि पुलिस ने हिंदुओं की सुरक्षा करने की बजाय अक्सर उन्हें सुरक्षा से वंचित किया।
2021: दुर्गा पूजा के दौरान धार्मिक असहिष्णुता
13-24 अक्टूबर 2021 को दुर्गा पूजा के दौरान बांग्लादेश में एक नई हिंसा की घटना हुई। कुमिल्ला जिले में एक मंदिर में कुरान को देवी दुर्गा की मूर्ति के पास रखने की घटना को लेकर हिंसा शुरू हुई। हालाँकि, बाद में पता चला कि यह 'इकबाल हुसैन' नामक एक व्यक्ति ने जानबूझकर ऐसा किया था, संभवतः इसी तरह की हिंसा भड़काने के लिए।
इस घटना के बाद बांग्लादेश भर में हिंदु समुदाय पर हमले हुए। कम से कम 1,650 हिंदु घरों को जलाया गया, 343 मंदिरों को तोड़ा गया, 14 हिंदु मारे गए, 26 हिंदु महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया, और 17 लोग लापता हो गए। बांग्लादेश के इतिहास में यह सबसे बड़े सामूहिक हिंसा के प्रकरणों में से एक था।
2024: अगस्त का विद्रोह और हिंदुओं पर हमले
अगस्त 2024 में बांग्लादेश में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परिवर्तन हुआ। प्रधानमंत्री शेख हसीना, जो 15 वर्षों से सत्ता में थीं, को जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के दबाव में इस्तीफा देना पड़ा। यह आंदोलन शुरुआत में शिक्षा में कोटा व्यवस्था को लेकर उभरा था, लेकिन बाद में हसीना सरकार के विरुद्ध एक व्यापक विद्रोह में परिणत हुआ।
5 अगस्त 2024 को शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया और भारत भाग गईं। इसके बाद जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण था। हिंदुओं को अवामी लीग का समर्थक माना जाने लगा (क्योंकि हसीना सेक्युलर नीतियों का समर्थक थीं), और परिणामस्वरूप हिंदुओं पर व्यापक हमले हुए।
4 से 20 अगस्त 2024 के बीच, बांग्लादेश हिंदु बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने कुल 2,010 घटनाओं की रिपोर्ट की, जिनमें 69 मंदिर शामिल थे। 157 परिवारों के घर और व्यवसायों को लूटा गया, तोड़ा गया, और जलाया गया। कुल 5 हिंदु मारे गए, जिनमें से कम से कम 2 की पुष्टि की गई।
बांग्लादेश में हिंदु भेदभाव की संरचना: कानूनी औजार
वेस्टेड प्रॉपर्टी एक्ट: हिंदुओं से जमीन छीनने का कानूनी तरीका
बांग्लादेश में हिंदु उत्पीड़न केवल सामूहिक हिंसा तक सीमित नहीं है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि राज्य ने कानूनों के माध्यम से हिंदुओं को उनकी संपत्ति से वंचित किया है। 1965 में पाकिस्तान ने 'एनेमी प्रॉपर्टी एक्ट' पास किया, जिसका उद्देश्य उन लोगों की संपत्ति को जब्त करना था जो भारत चले गए थे। लेकिन इस कानून को भेदभावपूर्ण तरीके से लागू किया गया। जो हिंदु बांग्लादेश में ही रहे, उनकी संपत्ति भी जब्त कर ली गई।
1974 में बांग्लादेश ने इसे 'वेस्टेड प्रॉपर्टी एक्ट' के नाम से दोहराया। इस कानून के तहत, 1965 से 2006 तक, 12 लाख घरों और 60 लाख हिंदुओं की 26 लाख एकड़ जमीन जब्त कर ली गई। यह आंकड़े अकेले बताते हैं कि व्यवस्थित उत्पीड़न कितना गहरा था।
यह कानून कैसे काम करता था? मान लीजिए एक हिंदु के पास एक प्लॉट था। कोई मुसलमान जमीन पर कब्जा कर लेता था और फिर स्थानीय प्रशासन से कहता था कि यह संपत्ति 'दुश्मन संपत्ति' है और इसे सरकार के पास जब्त किया जाना चाहिए। स्थानीय अधिकारी, भ्रष्टाचार के कारण, अक्सर इन अनुरोधों को मंजूरी दे देते थे। जब असली मालिक अदालत जाता था, तो मामला दशकों तक चलता रहता था। इस बीच, उसके पास जमीन का कोई आय नहीं होता था और वह गरीब हो जाता था।
दमनकारी कानून और संवैधानिक भेदभाव
बांग्लादेश के संविधान में भी हिंदुओं के विरुद्ध भेदभाव देखा जा सकता है। भारत के विपरीत, जहाँ भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समान मानता है, बांग्लादेश ने हमेशा 'अल्पसंख्यक' शब्द का भेदभावपूर्ण उपयोग किया है। सार्वजनिक नौकरियों में, हालाँकि सिद्धांत में हिंदुओं के लिए कोटा है, लेकिन व्यावहार में उन्हें अक्सर उच्च पदों से वंचित किया जाता है।
जुलाई 2024 में बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला दिया जो और भी गंभीर था। इसने शैक्षणिक और सार्वजनिक नौकरियों में मेरिट-आधारित भर्ती को 93% तक बढ़ा दिया और जातीय अल्पसंख्यकों के लिए कोटा को घटाकर मात्र 1% कर दिया। यह निर्णय, जब हिंदु आबादी 8% है, स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण है।
शरीफ ओसमान हादी की मृत्यु: दिसंबर 2024 का ट्रिगर
कौन था शरीफ ओसमान हादी?
दिप्पु चंद्र दास की हत्या से कुछ दिन पहले, 12 दिसंबर 2024 को बांग्लादेश में एक और भयानक घटना हुई। शरीफ ओसमान हादी, एक प्रभावशाली युवा नेता जिन्होंने जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, को गोली मार दी गई। हादी 32 वर्ष के थे और 'इंकिलाब मंच' के प्रवक्ता थे।
12 दिसंबर को हादी ढाका के पालतन क्षेत्र में अपने चुनाव प्रचार के दौरान एक ई-रिक्शा में बैठे थे। अचानक एक मोटरसाइकिल सवार ने उन पर गोली चलाई। गोली सीधे उनके सिर में लगी। उन्हें तुरंत ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें जातिगत स्तर की सर्जरी की गई। लेकिन उनकी स्थिति बिगड़ती रही। 15 दिसंबर को उन्हें सिंगापुर भेजा गया, जहाँ 18 दिसंबर को उनकी मृत्यु हो गई।
जनक्रोध और अराजकता
हादी की मृत्यु के बाद बांग्लादेश में अभूतपूर्व अराजकता फैल गई। विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए। समाचार कार्यालयों पर हमले हुए। प्रथम अलो और द डेली स्टार जैसे प्रमुख समाचार पत्रों के कार्यालयों को आग लगाई गई। पत्रकारों को अपनी जानें बचानी पड़ीं।
इसी अराजकता के बीच, जब शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी, तब हिंदु अल्पसंख्यकों पर नई हिंसा हुई। भीड़ को लगता था कि हादी की मृत्यु के लिए कोई भारतीय साजिश थी (हालाँकि कोई सबूत नहीं है), और परिणामस्वरूप हिंदुओं पर हमले हुए, जिन्हें भारत का समर्थक माना जा रहा था।
बांग्लादेश में हिंदु उत्पीड़न के कारण
धार्मिक असहिष्णुता और इस्लामिक कट्टरपंथ
बांग्लादेश में हिंदु उत्पीड़न के पीछे एक मुख्य कारण धार्मिक असहिष्णुता है। स्वतंत्रता के बाद बांग्लादेश एक सेक्युलर राज्य के रूप में शुरू हुआ, लेकिन धीरे-धीरे इसमें इस्लामिक राष्ट्रीयवाद का झुकाव बढ़ता गया। 1988 में इस्लाम को राष्ट्रीय धर्म घोषित किया गया। इसके बाद से, इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन, विशेषकर जमात-ई-इस्लामी और बांग्लादेश राष्ट्रवादी दल (बीएनपी), ने हिंदुओं को अपने राजनीतिक लक्ष्यों का शिकार बनाया।
राजनीतिक हिंसा
बांग्लादेश में चुनाव के मौसमों में हिंदु विशेष रूप से असुरक्षित होते हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों की सत्ता की लड़ाई में, हिंदुओं को 'दुश्मन' के रूप में चिह्नित किया जाता है। 2001 में, जब बीएनपी सत्ता में आए, तो उन्होंने हिंदुओं को अवामी लीग के समर्थक मान लिया और उन पर हमले कराए। 2024 में भी, जब अवामी लीग की सरकार गिरी, तो हिंदुओं को बदला लेने का निशाना बनाया गया।
भूमि विवाद और संपत्ति की छीना-झपटी
बांग्लादेश में हिंदु उत्पीड़न का 70% कारण भूमि और संपत्ति से संबंधित है। वेस्टेड प्रॉपर्टी एक्ट, स्थानीय भ्रष्ट अधिकारी, और जमीन माफिया - ये सभी मिलकर हिंदुओं की संपत्ति को जब्त कर लेते हैं। जब हिंदु अदालत में जाते हैं, तो मामले दशकों तक चलते रहते हैं।
सोशल मीडिया पर झूठी अफवाहें
दिप्पु की हत्या से पता चलता है कि सोशल मीडिया पर झूठी अफवाहें कितनी घातक हो सकती हैं। धर्मनिंदा का आरोप कभी-कभी बिना किसी सबूत के लगाया जाता है, और यह भीड़ की हिंसा को ट्रिगर कर देता है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और मानवाधिकार संगठनों की चिंता
संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की प्रतिक्रिया
दिप्पु की हत्या के बाद भारत सहित कई देशों ने बांग्लादेश को अपनी चिंता जताई है। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत को बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने बांग्लादेश सरकार से मांग की है कि वह हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
इस्कॉन पर प्रतिबंध की मांग
नवंबर 2024 में एक चिंताजनक घटना हुई। इस्लामिक कट्टरपंथी संगठनों ने बांग्लादेश सरकार से इस्कॉन (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस) पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। हेजाजत-ई-इस्लाम और अन्य समूहों ने यहाँ तक कहा कि अगर सरकार इस्कॉन पर प्रतिबंध नहीं लगाएगी, तो वे हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे - जिसका मतलब था कि अगर इस्कॉन पर प्रतिबंध नहीं हुआ, तो वे हिंदुओं को मारेंगे।
इस्कॉन के पूर्व नेता चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को अक्टूबर 2024 में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उन्हें यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने बांग्लादेश का राष्ट्रगान अपमानित किया। हालाँकि, यह निश्चित नहीं है कि वास्तव में क्या हुआ।
बांग्लादेश में हिंदु जीवन: असुरक्षा और भय का माहौल
दैनिक भेदभाव
हिंदु उत्पीड़न केवल हिंसा तक सीमित नहीं है। बांग्लादेश के हिंदु दैनिक आधार पर भेदभाव का सामना करते हैं। उन्हें 'काफिर' (अविश्वासी) कहा जाता है। शिक्षा, रोजगार, और व्यवसायिक अवसरों में उन्हें हिंदु होने के कारण भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
विस्थापन और पलायन
लाखों हिंदु बांग्लादेश से भारत आ गए हैं। कुछ 1947 में, कुछ 1971 में, और अभी भी कुछ हर साल आ रहे हैं। जो बांग्लादेश में बचे हैं, वे अक्सर असुरक्षा में रहते हैं। उन्हें पता है कि किसी भी राजनीतिक बदलाव या धार्मिक असहिष्णुता की घटना के बाद उन पर हमले हो सकते हैं।
महिलाओं और बच्चों पर विशेष हिंसा
सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि हिंदु महिलाएँ और बच्चियाँ सामूहिक हिंसा के समय विशेष रूप से निशाना बनती हैं। 2001 में चर फ्रैसन का बलात्कार कांड, जहाँ 600 हिंदु महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया, इसका एक उदाहरण है। 2021 में भी, कई हिंदु महिलाओं के साथ हिंसा की गई।
मुहम्मद यूनुस की सरकार और हिंदु सुरक्षा
प्रारंभिक आश्वासन
जब मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार 8 अगस्त 2024 को सत्ता में आई, तो उन्होंने प्रारंभिक आश्वासन दिए कि वे हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। यूनुस ने धाकेश्वरी मंदिर का दौरा किया और हिंदु समुदाय से मिले। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी यूनुस ने आश्वासन दिया कि हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
असफलता की गल्प
लेकिन जमीन पर स्थिति अलग थी। अगस्त-सितंबर 2024 में सैकड़ों हिंदु घर जल गए, मंदिर तोड़े गए। यूनुस सरकार ने कुछ गिरफ्तारियाँ की हैं, लेकिन वास्तविक अपराधियों को पकड़ने में विफल रही। इसके बाद, यूनुस की सरकार खुद ही इस्कॉन के विरुद्ध कार्रवाई करने लगी, जो एक हिंदु संगठन है। यह एक विरोधाभास था।
दिप्पु की हत्या के बाद, यूनुस सरकार ने तुरंत निंदा की और कहा कि अपराधियों को नहीं छोड़ा जाएगा। लेकिन क्या यह पर्याप्त है? क्या मात्र निंदा से ये अपराध रुक जाएँगे?
निष्कर्ष: एक अधूरी कहानी जो भारतीयों को जागरूक करती है
बांग्लादेश में हिंदु उत्पीड़न की समस्या शुरुआत में भारतीयों के लिए केवल समाचार के रूप में रही, लेकिन दिप्पु चंद्र दास की भयानक मृत्यु ने सभी को चेता दिया है। यह केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि एक व्यवस्थित और सुनियोजित उत्पीड़न का परिणाम है।
1971 से अब तक, बांग्लादेश में हिंदु आबादी 20% से घटकर 8% रह गई है। वेस्टेड प्रॉपर्टी एक्ट से लाखों हिंदुओं की जमीन छीन ली गई है। सामूहिक हिंसा ने हजारों मारे हैं और लाखों को विस्थापित किया है। इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन लगातार हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं। और अब, यूनुस सरकार भी हिंदु संगठनों को दमित कर रही है।
भारतीयों को यह समझना चाहिए कि बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह एक अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार का मुद्दा है। संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, यूरोपीय संघ - सभी को इस पर ध्यान देना चाहिए। और भारत को, अपने पड़ोसी देश के नागरिकों की सुरक्षा के लिए, बांग्लादेश पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाना चाहिए।
दिप्पु चंद्र दास की आत्मा को शांति मिले। लेकिन उसकी मृत्यु व्यर्थ न हो - यह संदेश दे गई है कि भेदभाव और असहिष्णुता कितनी घातक हो सकती है।
FandQ:-
दीपू चंद्र दास की हत्या कब और कहां हुई?
18 दिसंबर 2024 को बांग्लादेश के मेमसिंह जिले के भालुका उपजिले में पायनियर निट कंपोजिट फैक्ट्री के बाहर दीपू की भीड़ द्वारा हत्या की गई।
दीपू की हत्या का कारण क्या था?
एक झूठी अफवाह फैलाई गई कि दीपू ने फेसबुक पर पैगंबर मुहम्मद के बारे में अपमानजनक बातें कहीं। जांच में पता चला कि यह पूरी तरह झूठ था। कोई सबूत नहीं मिला कि दीपू ने कोई ऐसा पोस्ट किया था।
बांग्लादेश में हिंदु आबादी कितनी है?
2022 की जनगणना के अनुसार, बांग्लादेश की कुल आबादी का मात्र 8% हिंदु हैं। 1971 में यह 15-20% थी। पिछले 50 सालों में हिंदु आबादी 7.5 लाख घट गई है।
वेस्टेड प्रॉपर्टी एक्ट क्या है?
1974 में बांग्लादेश ने यह कानून बनाया जिसके तहत हिंदुओं की जमीन सरकार जब्त कर सकती है। इसके तहत 1965 से 2006 तक 12 लाख घरों और 60 लाख हिंदुओं की 26 लाख एकड़ जमीन छीन ली गई।
2021 में दुर्गा पूजा के समय क्या हुआ?
अक्टूबर 2021 को एक कुरान को दुर्गा मंदिर में रखने की घटना को लेकर बांग्लादेश भर में हिंदुओं पर हमले हुए। 1,650 घर जले, 343 मंदिर तोड़े गए, 14 हिंदु मारे गए और 26 महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया।
अगस्त 2024 में क्या हुआ?
प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे के बाद (5 अगस्त 2024) हिंदुओं को अवामी लीग का समर्थक मानकर व्यापक हमले किए गए। 2,010 घटनाएं रिपोर्ट की गईं, जिनमें 69 मंदिर शामिल थे।
चिन्मय कृष्ण दास क्यों गिरफ्तार किए गए?
इस्कॉन के नेता चिन्मय कृष्ण दास को अक्टूबर 2024 में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उन्हें आरोप था कि उन्होंने राष्ट्रगान अपमानित किया, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार हिंदुओं की सुरक्षा के लिए क्या कर रही है?
मुहम्मद यूनुस की सरकार ने हिंदुओं की सुरक्षा के वादे दिए हैं, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर स्थिति अभी भी गंभीर है। सरकार ने कुछ गिरफ्तारियां की हैं, लेकिन कई मामलों में कार्रवाई अधूरी रही है।
हिंदु आबादी घटने के मुख्य कारण क्या हैं?
भारत-पाकिस्तान विभाजन (1947) - 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध - 1971 का बांग्लादेश मुक्ति संग्राम - वेस्टेड प्रॉपर्टी एक्ट - इस्लामिक कट्टरपंथ का उदय - राजनीतिक हिंसा - सामूहिक भेदभाव
क्या भारत इसके लिए कुछ कर सकता है?
भारत ने बांग्लादेश को अपनी चिंता जताई है। भारत के विदेश मंत्रालय ने हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। भारत अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र और अन्य देशों से सहयोग मांग सकता है।
