मुंबई के प्रसिद्ध वकील आदित्य स्मार्ट की अंधेरी राजनीति | पुलिस भी अवाक रह गई
क्या आपको पता है? मुंबई के सबसे प्रसिद्ध वकील आदित्य स्मार्ट की जिंदगी बिल्कुल वैसी नहीं थी जैसी दिखाई देती थी। उनके महंगे घर, लग्जरी कार, और खूबसूरत पत्नी के पीछे एक अंधेरा राज छिपा था। एक ऐसा राज जिसके सामने कानून भी विफल हो गया। आइए जानते हैं उस भयानक सच्चाई को जो आपका खून ठंडा कर देगी...
आदित्य स्मार्ट ,स्टाइलिस्ट वकील जिसका नाम मुंबई की सभी फेमस लो फार्मों में था। शहर में हर कोई उसे जानता और सम्मान करता था। सभी लोगों को उसकी लाइफ परफेक्ट लगती थी। वो एक लग्जरी लाइफ जीता महंगी कार,आलीशान घर,सुंदर पत्नी जो उसकी खुशहाल लाइफ की तस्वीर को पूरा करती थी।आदित्य की शादी को अभी कुछ ही महीने हुए थे, लेकिन आदित्य और नीरु एक दूसरे को पहले से जानते थे। लेकिन वे एक दूसरे से प्यार नहीं करते थे।। नीरू आदित्य के साथ इंटर्नशिप पर थीं। आदित्य नीरू की सादगी से प्रभावित हो गया। जब आदित्य ने नीरू को शादी के लिए प्रपोज किया तो नीरू ने मना नहीं किया, क्योंकि आदित्य ने रोका आइडल था।वो भी आदित्य से शादी करने के लिए तैयार हो गई। दोनों अपनी लाइफ को एन्जॉय कर रही थी। आदित्य हमेशा उसे रोमैन्टिक फील करवाने के लिए हमेशा कुछ ना कुछ एक्स्ट्रा करता।कभी उसके कदमों में फूल बिछाता, कभी अपने हाथों से उसके लिए नाश्ता बनाता और उसे अपने गोद में बिठाकर अपने हाथों से खिलाता है। दोनों की लाइफ ऐसे ही रोमैन्टिक चल रही थी।नीरू भी आदित्य से खुश थी। आदित्य एक रात को नीरू के सो जाने के बाद तहखाने में गया।, जिसकी खबर नीरू को नहीं थी।आदित्य रात के 2:15 बजे तहखाने में गया।जो 50 साल पुराना था, जिसे आदित्य ने सबसे छुपा के रखा। वो वहाँ जाने के लिए कभी भी लाइट ऑन नहीं करता।हमेशा एक जलती मसाल लेके जाता।तहखाने के कमरे में अंधेरों और बदबू ,मकड़ी के जाले और चारों तरफ शराब की बोतलें पड़ी थीं। तहखाने की दीवारें काली और उस पर नाखून से खरोच किए हुए निशान थे। खाना देखने में ये ऐसा था जैसे वह अपनी एक भयानक कहानी बता रहा हो।आदित्य वहाँ घंटों बैठा रहता। अगली सुबह जब नीरू उठी तो उसे आदित्य में से शराब और पसीने की स्मेल आरही थी।जबकि आदित्य शराब नहीं पीता था। नीरु देखा कि आदित्य हर रात 1;45 पर कहीं जाता। और 3:30 बजे वापस आ जाता। नीरू को लगा आदित्य का किसी के साथ अफेयर चल रहा है। लेकिन आदित्य में से आने वाली शराब और पसीने की स्मैल नीरू को परेशान कर रही थी।कहीं कुछ और बात तो नहीं है?यह सोचकर एक रात नीरू ने उसका पीछा करने का फैसला किया। अंधेरे में उसने देखा कि आदित्य सीधे किसी तहखाने की ओर जा रहा है।जिसके बारे में नीरू को पता नहीं था।ये सोचकर नीरू को हैरानी हुई कि इस घर में तहखाना भी है। उसने पहले कभी तहखाने के बारे में नहीं सुना था। डरते डरते नीरू भी आदित्य के पीछे तहखाने में गयी।वहाँ चारों तरफ अंधेरा था। लेकिन तहखाने कुछ भी नहीं था, सिर्फ खाली कमरों के अलावा। नीरू अवाक रह गई।आदित्य कहा गया। उसने मोबाइल की टॉर्च ऑन की।वहाँ का नजारा देखकर उसका खून जम गया।वे डरावनी दीवारें और नाखून से किये खरोच के निशान उस जगह को और भयानक बना रही थी। नीरु की नजर दीवार पर बने एक काले छेद पर गयी।जहाँ से कुछ आवाजें आ रही थी।नीरू ने वहाँ कान लगाकर आवाजें सुनी। यह आवाज़ कोई साधारण आवाज नहीं थी।दर्द भरी किलकारियां जैसे कोई पीड़ा में चिल्लाए जा रहा हो वे चीख ऐसी जो अपने लिये ज़िन्दगी नहीं मौत मांग रही हो। इतना दर्द था उस चीख में।उसने छेद में से देखा ।ये सब देखकर नीरू अपने पैरों की ताकत खोने लगी, नीरू वहाँ से निकलना चाहती थी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पीछे से एक हाथ आया और उस का गला दबा दिया। उसने आदित्य की आवाज सुनाई दी। पर ये आदित्य नहीं।कुछ गहरा राज़ था। कुछ अलौकिक पर इंसान नहीं। जो कह रहा था तुम्हें यह सब नहीं देखना चाहिए था।आखिर ऐसा क्या देखा नीरू ने? अगली सुबह घर में नीरु का नामो निशान तक नहीं था। एक घर के एक कोने में उसका सामान पड़ा था। नौकरों को भी हैरानी हुई नीरू को ना पाकर और उसका सामान एक कोने में पड़ा देख।जब कई दिन तक नीरु का कुछ पता नहीं लगा। आदित्य के खिलाफ़ पुलिस में रिपोर्ट हुई। पुलिस ने आदित्य से हजारों सवाल पूछे।लेकिन आदित्य की कहानी एकदम सीधी थी।उसने कहा, वह रात को उठी और चली गयी।शायद वह किसी के साथ भाग गयी।मुझे कुछ नहीं पता उसने ऐसा क्यों किया। और वो कहा गयी?पुलिस को अदित्य के खिलाफ़ में कोई सबूत नहीं मिला।पड़ोसियों को भी आदित्य को देखकर हैरानी हो रही थी।क्योंकि जो इंसान अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था, वह अब भी सामान्य दिख रहा था। कुछ का कहना था कि शायद आदित्य अपना दुख दिखाना नहीं चाहता। कुछ कहते थे कि नीरू के गायब होने में आदित्य का हाथ है या फिर नीरू को गायब आदित्य नहीं किया है। आदित्य वैसा नहीं है जैसा वह दिखता है।इसने अपने चेहरे पर एक नकाब लगा रखा है।लोगों में आपस में कानाफूसी होती रहती। आदित्य के घर के आसपास एक आवारा कुत्ता रहता था हर दिन सुबह आदित्य के घर के चारों ओर चक्कर काटता रहता है जैसे वो कोई चीज़ ढूंढता हो।1 दिन सुबह 6:00 बजे उस कुत्ते को सूखी और कटी हुई लाश मिली।कुत्ता उस लाश को देखकर बार बार भोंक रहा था।कुत्ते की आवाज सुनकर पड़ोसी भी बाहर आ गए। लाश देखकर चारों तरफ सन्नाटा छा गया।नहीं। और जल्द ही पुलिस आ गई।पुलिस का शक फिर आदित्य पर गया।लेकिन फिर कोई कोई सबूत नहीं मिला। आदित्य फिर सामान्य जिंदगी जीने लगा।लेकिन कई लोगों का शक अभी भी आदित्य से नहीं हटा था।कुछ दिन बाद आदित्य घर में एक नौकरानी नीमा आई ।तीन हफ्ते बाद वह भी गायब हो गई। पुलिस की जांच में फिर कोई सबूत नहीं मिला।सबूत मिलता भी कैसे? वो एक वकील हैं।आपने पीछे कोई सबूत नहीं छोड़ता।लेकिन पुलिस तो एक नजर में बता देती हैं। कौन अपराधी और कौन बेगुनाह?पुलिस अभी भी अपनी नजर आदित्य बनाए हुए थी।फिर आदित्य का एक सहकर्मी।और उसके बाद उनका एक रिश्तेदार।हर बार इसी पैटर्न के साथ गायब हो गए।रात को अचानक कुछ डरावनीआवाजें आती उसके अलावा पड़ोसियों कुछ पता नहीं था। पड़ोसियों को अब आदित्य से डर लगने लगा है।क्योंकि रात के समय आदित्य को कोई देखता तो उसका चेहरा बदला हुआ दिखाई देता। उसकी आंखें लाल और बड़ी दिखती।
वे उससे दूरी बनाने लगे। और बात करना बंद कर दी।कुछ लोग तो वहाँ से दूसरी जगह शिफ्ट हो गई।एक बार एक जांच अधिकारी विक्रम ने ध्यान से देखा, उसने लगा कुछ तो है आदित्य के घर में। जो भी गायब हो रहा है। उसका संबंध आदित्य और उसके घर से है।1 दिन जांच अधिकारी ने आदित्य के घर में घुसने की योजना बनाई। जब वे रात को अंदर गया तो उसने घर के अंदर अविश्वसनीय चीज़ देखी। एक काली दीवार।जिस पर हजारों नाम नाखून से खरोंच के लिखे हुए थे।महिलाओं के, बच्चों के नाम सब पुरानी लिखावट में।कुछ नाम नए भी थे।जैसे नीरु, नीमा और भी नाम हर नाम के साथ एक तारीख लिखी हुई थी। वह तारीख उस दिन की थी जब वह व्यक्ति गायब हुआ था।विक्रम समझ गया । कि वह किसी सीरियल किलर के घर में था। विक्रम ने दीवार के काले छेदमे से देखा, हल्की सी रौशनी में कुछ हिल रहा था।जब विक्रम ने अपनी टॉर्च की रौशनी उस तरफ की तो देखा। आदित्य तो हड्डियों का ढांचा था।वे मर चुका था, फिर ये आदित्य कौन है?और ये कब से आदित्य बन के घूम रहा है?जो खाना खाता है लोगों से बातें करते हैं, वे कुछ और था वह बिल्कुल अलग। आदित्य विक्रम को वहाँ देख लेता है। वह कहता है तुमने मेरे बारे में इतना जान ही लिया तो मेरा पूरा सच जान लो।मैं 15 साल से आदित्य बन कर लोगों के बीच में रह रहा हूँ। एक रात अदिति जमीन पर सो गया।नीचे उसे कुछ दर्द भरी चीखें सुनाई दीं।और उसने ये तह खाना ढूंढ लिया। आवाज सुनकर के जब वो इस कोठरी में आया।कोठरी का दरवाजा खुलते ही मैं आजाद हो गया।उसी समय मैंने आदित्य को यहाँ बांधा। और खुद आदित्य बन गया। इस रूप रहना मेरे लिए मुश्किल था। मुझे समय समय पर इंसानों की बलि देनी होती।मैंने नीरू से शादी इसीलिए की ताकि किसी को मुझ पर शक न हो।लेकिन नीरू को मेरी सच्चाई का पता लग गया था।और मैंने उसे कुछ दिन बांधकर रखा और समय आने पर उसकी बलि दे दी। वो दीवार के बीच में से एक दरवाजा खोलता है।जो घर के बाहर की तरफ खुलता था। उसने। वहाँ पर उसे कई लाशें दिखाई ।आदित्य ज़ोर से हंसता है।अब ये सच बताने के लिए तुम भी जिंदा नहीं रहोगे।और अपना असली रूप दिखाता है।एक लंबा काला व्यक्ति जिसकी नसे बाहर की ओर उभरी हुई थी।लाल और अंदर ढसी हुई आँखें ,डरावना चेहरा।जिसे देखकर रूह भी कांप जाए ऐसा डरावना उसके बाद विक्रम का क्या हुआ किसी को कुछ नहीं पता चला।उसकी रिपोर्ट सरकारी रिकॉर्ड तक नहीं पहुँच पाई। वो घर अब भी वहीं खड़ा है।घर की खिड़कियों पर रोजाना रात को एक छाया दिखाई देती हैं। तहखाने से अब भी अजीब आवाजें आती है।जो कोई भी उस घर में जाता वे गायब हो जाता । उसका नाम दीवार पर खरोचें के साथ लिखा होता।नीरु का नाम अब भी दीवार पर लिखा हुआ था और उसके साथ और भी कई नाम जुड़ गए थे।एक ऐसी काली शक्ति जो पल भर में कुछ भी कर सकती है।वो लोगों के बीच में रह रही है।कभी भी कुछ भी खतरनाक और डरावना हो सकता है।आज भी वे चीजें सब उसी पैटर्न के साथ चल रही है।जो जाता है वह गायब हो जाता है।
FAQ:-
1: क्या यह कहानी सच है?
A: हां, यह एक सच्ची कहानी है जो भारतीय क्राइम इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना को दर्शाती है। हालांकि, कुछ नाम और विवरण गोपनीयता के लिए बदले गए हैं।
2: आदित्य स्मार्ट असली व्यक्ति हैं?
A: आदित्य स्मार्ट इस कहानी में एक परिकल्पित नाम है, लेकिन ऐसी घटनाएं भारतीय शहरों में वाकई हुई हैं। इस कहानी को एक वास्तविक अपराध के आधार पर तैयार किया गया है।
3: तहखाने में हजारों नाम क्या थे?
A: गायब लोगों के नाम जो इस काली शक्ति द्वारा बलि दिए जा चुके थे। हर नाम के साथ उनके गायब होने की तारीख लिखी थी। यह एक भयानक रिकॉर्ड था।
4: पुलिस ने क्या किया?
A: जांच अधिकारी विक्रम को सच्चाई का पता चल गया था, लेकिन जब वह इस काली शक्ति का सामना करता है, तो उसका भी कोई सुराग नहीं मिलता। विक्रम की रिपोर्ट सरकारी रिकॉर्ड तक नहीं पहुंचती।
5: क्या आदित्य स्मार्ट अभी भी जीवित है?
A: कहानी के अनुसार, असली आदित्य स्मार्ट तो 15 साल पहले ही मर चुका था। जो आदित्य बन कर घूमता था, वह एक अलौकिक शक्ति थी। घर अब भी वहीं खड़ा है, और रहस्य अभी तक अनसुलझा है।
6: घर का क्या हुआ?
A: वह घर अभी भी उसी जगह पर खड़ा है। खिड़कियों पर रोज रात को एक छाया दिखाई देती है, और तहखाने से अजीब आवाजें आती रहती हैं। जो भी उस घर में जाता है, वह गायब हो जाता है।
7: यह कहानी कितनी सच है?
A: इस कहानी के कुछ हिस्से वास्तविक घटनाओं पर आधारित हैं, जबकि कुछ काल्पनिक तत्व भी जोड़े गए हैं ताकि यह और रोचक और डरावनी बन सके। लेकिन ऐसी अंधेरी शक्तियां वाकई मौजूद हैं।
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