आदत डाल लो: अनुराग और कीर्ति की अधूरी मोहब्बत

आदत डाल लो: अनुराग और कीर्ति की अधूरी मोहब्बत


इंट्रोडक्शन :-

कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है जहाँ दिल चाहता है रुक जाना, लेकिन हालात हमें आगे बढ़ने पर मजबूर कर देते हैं। अनुराग और कीर्ति की कहानी ऐसी ही एक मुलाकात से शुरू होती है, जहाँ एक पेंटिंग ने दो दिलों को जोड़ दिया। कीर्ति की मुस्कान और उसकी सोच ने अनुराग को बदल दिया। लेकिन कीर्ति के दिल में एक सच्चाई थी — एक बीमारी जो उसे धीरे-धीरे दूर ले जा रही थी। यह कहानी हमें सिखाती है कि प्यार सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि किसी को उसकी खुशी के लिए छोड़ देने का भी नाम है।

आदत डाल लो: अनुराग और कीर्ति की अधूरी मोहब्बत


अनुराग ने कीर्ति  को पहली बार पैंटिंग एग्जिबिशन में देखा था।वो बच्चो के साथ खेल रही थी, उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वह भी एक बच्ची हो। खेलती की जिंदादिली अनुराग के दिल में बस गई।अनुराग को वहाँ देखकर उसका दोस्त साहिल उसे बुलाता।अनुराग को पेंटिंग में कोई ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी।वो तो साहिल ने पेंटिंग एग्जीबिशन ऑर्गनाइज किया था, तो सहिल के ज़ोर देने पर अनुराग वहाँ आ गया था  साहिलअनुराग को वहाँ पेन्टिंग दिखाने लगा।अनुराग को वहाँ पर एक पेंटिंग बहुत अच्छी लगी। अनुराग साहिल से कहता है, ये कितनी अच्छी पेंटिंग है इसमें प्रकृति को एक रूप से दूसरे रूप में उभरते हुए दिखाया। गुड डे। जैसे अंत कहीं नजर नहीं आ रहा  बस एक नई शुरुआत दिखाई देती है।जैसे जिंदगी का कोई अंत नहीं, बस एक नई शुरुआत हो।यह एक मोटिवेशनल पेंटिंग दिख रही है।या हर अंत के बाद कुछ करने की हिम्मत जागती हो?इस पेंटिंग ने तो मेरा नजरिया ही बदल दिया।मेरा अगर एक काम नहीं बनता तो मैं हिम्मत हारने लगता हूँ।इस पेटिंग को देखने के बाद तो जैसे कोई चीज़ का अंत है ही नहीं।इस पेंटिंग के कलाकार से तो मैं मिलना चाहूंगा। साहिल कहता हैं, बस इतनी सी बात है वो तो मैं तुम्हें अभी मिलवा देता हूँ। वह कलाकार यहीं  है। साहिल अनुराग को उस कलाकार कीर्ति से मिलवाता है। कीर्ति को देखकर अनुराग को यकीन नहीं हुआ कि यह पेंटिंग कीर्ति ने बनाई होगी।कीर्ति को देखकर जैसा नहीं लग रहा था की उसको ज़िंदगी की इतनी समझ होगी।उस समय अनुराग और कीर्ति की पहली बार बातचीत हुई। अनुराग को कीमती कुछ समझ से परे लग रही थी।उसकी सोच में गंभीरता थी, वहीं उस मैं बचपना था।जो उसे बच्चों के साथ बच्चा बनाए हुए था।अनुराग समझ नहीं आता इसका असली पहलू कौन सा है?कहीं ये पेंटिंग किसी और ने तो नहीं बनाई है?अनुराग उससे वो वापिस वही पेंटिंग बनाने के लिए कहता है लेकिन कलर चेंज करके।किर्ति ने  कुछ ही समय बाद वह पेंटिंग बना दी।अनुराग कीर्ति से पूछता आप क्या करते हो?कीर्ति कहती हूँ, मैं एक पेंटिंग क्लास चलाती हूँ।खेलती की पेंटिंग क्लास वही थी जहाँ अनुराग कोचिंग लेने जाता था। अनुराग अक्सर कोचिंग क्लास के बाद रुककर कीर्ति का इंतज़ार करता।दोनों अक्सर बातें करते।अब ये मुलाकात एक दोस्ती  में बदलने जा रही थी।दोनों अक्सर कोचिंग क्लास के बाहर मिलते और एक दूसरे टाइम बिताते हैं। साथ में चाय पीते या कुछ बातें करते।अनुराग को बातें करना पसंद था, वहीं कीर्ति को सुनना।कीर्ति अनुराग को ही देखती रहती।और इसकी खबर अनुराग को भी नहीं होती।अनुराग अक्सर कृति को कहता, मैं तुमसे इतनी बाते करता हूँ, तुम सिर्फ सुनती रहती हो।तुम किसी बात का जवाब क्यों नहीं देती?क्या तुम्हें मेरा बातें करना अच्छा नहीं लगता?लेकिन मुझे तुम्हारा चेहरा देखना बहुत अच्छा लगता है।जब तुम शांत होकर मेरी तरफ देखती हो।जैसे ये पल मेरे लिए सब से हसीन हो।अनुराग की बातों से लगता है जैसे वो कीर्ति को प्यार करने लगा हो।लेकिन कीर्ति नहीं चाहती थी कि अनुराग उसे प्यार करें।वो अपनी मुलाकात को एक दोस्ती तक ही सीमित रखना चाहती थी।पर कहते हैं दिल पर किसी का ज़ोर नहीं चलता। अनुराग कीर्ति से कहता है तुम अपना पूरा ध्यान अब के पल में ही लगाती हो।चाहे वे बातें करना हो या फिर चीजों को देखना या फिर मस्ती करना।कीर्ति तुम अपना पूरा फोकस आज मैं रखती हो?जैसे तुम्हे आने वाले की कल  की कोई चिंता ही ना हो।, जैसे कल से तुम्हारा कोई मतलब ही नहीं हो।, कोई लेना देना न हो।और मैं अपने भविष्य की चिंता करता रहता।जिंदगी आगे कैसी होगी?यही सोचता रहता हूँ।अनुराग उससे कहता कीर्ति तुम खुल के जिंदगी जीती हों, जो कुछ आज ही करना चाहती हूँ जैसे कल के लिए तुम्हारे पास समय ही नहीं है।कीर्ति मुस्कुरा कर कहती कर का क्या भरोसा? क्योंकि जिस सच्चाई की वजह से कीर्ति अनुराग से प्यार नहीं करना चाहती थी।आज कीर्ति को भी उसी सच्चाई से डर लग रहा था।आखिर वो सच्चाई क्या है जिसे कीर्ति अनुराग से छुपा रही थी?लेकिन उसके दिल में प्यार की दस्तक तो हो चुकी थी।वो भी अनुराग के साथ जिंदगी जीने के ख्वाब देखती।फिर भी वह अनुराग से अपने प्यार का इजहार करने से क्यों घबरा रही थी?अनुराग ने तो उस शाम अपने प्यार का इजहार कर दिया।लेकिन कीर्ति नेअभी तक कोई जवाब नहीं दिया।कीर्ति की तबियत कुछ ज्यादा ही खराब हो गई।कीर्ति का पूरा चेकअप होता है? डॉक्टर फाइल देखकर बंद करते हुए कहता है इलाज चलेगा लेकिन वक्त तय नहीं है।क्योंकि तुम्हारा कैंसर है लास्ट स्टेज पर पहुँच गया।कीर्ति ने डॉक्टर से कोई सवाल नहीं किया।  बस सिर हिला दिया।शायद उसे भी जवाब पता था, इसलिए उसने कोई सवाल नहीं पूछा।कीर्ति को अपनी बिमारी का पता अनुराग से मिलने से पहले था।शायद इसीलिए वो अपने प्यार का इजहार नहीं कर पाई।लेकिन अनुराग से प्यार तो उससे भी बहुत था।वो भी अनुराग के साथ रहना चाहती थी।पर वो अनुराग को कोई दुख नहीं देना चाहती।वो पूरी रात दर्द में रही।और सुबह इस्माइल के साथ अनुराग से मिलने चली गयी।अनुराग कहता है क्या हुआ तुम लेट हो गयी?मुस्कुरा के दबी  आवाज़ में कहा,, जिंदगी से तो नहीं।,,लेकिन कुछ अभास तो अनुराग को भी हो गया था।आज कीर्ति कुछ अलग अलग रही है।शायद आज कीर्ति वही गलती करने वाली थी जिससे वह अब तक बचती आ रही थी।आज वो अपने प्यार का इजहार करने वाली थी।अनुराग से मिलते ही कीर्ति का चेहरा खिल गया। आज तभी वो अलग दिख रही थी।कीर्ति को इतना खुश देखकरअनुराग का चेहरा तो वैसा ही खिल जाता।अनुराग की खुशी देख कर।कीर्ति ने अपने आप को रोका।सोच अगर कल मै ना रही तो कहीं ये मेरी याद में यह खड़ा रह जाए और जिंदगी जीना भूल जाये।मैं इसे प्यार की इतनी बड़ी सजा नहीं दे सकती। किर्ति वे सब चीजो को भी रोककर अनुराग के साथ नॉर्मल हो कर बातें करने लगी।अनुराग अपने घर नौकरी और भविष्य की बातें करता।कीर्ति।अपना सिर हिला देती।वो कभी अपने आने वाले कल की बात नहीं करती क्योंकि उसके पास कल की कोई गारंटी नहीं थी।अब धीरे धीरे ज्यादा खराब रहने लगी।वह ज्यादातर अस्पताल के बिस्तर पे रहती।तो अनुराग के भेजे हुए पुराने वाइस मैसेज सुनती।कभी कभी हस्ती और कभी आँखें बंद कर लेती।उसको ये ऐसे देख के नर्स उससे **** दर्द ज्यादा है क्या?कीर्ति कहती नहीं।बस थोड़ा भारीपन है।वो ये नहीं बता पाती कि भारीपन सीने में नहीं यादों में है।बिमारीकी वजह से कीर्ति का अनुराग से मिलना कम होने लगा।अनुराग को कीर्ति में कुछ बदलाव नजर आ रहा था। जैसे पहले वो हर पल जिंदगी जीती  थी।अब लग रहा जैसे वो जिंदगी जीना ही नहीं चाहती हूँ।बहुत ज्यादा देर तक अनुराग के साथ नहीं रखती थी।ज्यादातर वो चुप ही रहती।जैसे हँसना और मस्ती करना तो वो भूल ही गयी हो। बस वो अनुराग को जी भरकर देखती रहती थी। 1 दिन अनुराग कीर्ति से पूछता है, अगर तुम्हें मैं पसंद नहीं हूँ या मुझसे बोर हो गयी हो तो बता दो ,अगर कोई और बात है जो तुम्हें परेशानी कर रही हो, तुम मुझे बता दो। कीर्ति ने कुछ देर देख अनुराग की तरफ़ देखा।और कहा क्या तुम सब कुछ ठीक कर दोगे?अनुराग ने बिना सोचे कहा अगर तुम बता दो, तो  शायद। कीर्ति ने अपनी नजर अनुराग  के चेहरे से हटाकर नीचे झुका लीं।कीर्ति  जानती थी अनुराग का जवाब। शायद कीर्ति अनुराग के इतने प्यार और परवाह की वजह से ही अपने प्यार का इजहार नहीं कर पा रही थी। वो अनुराग को बीच राह में अकेला नहीं छोड़ना चाहती थी।वो अनुराग को अपना दर्द नहीं देना चाहती थी। इसलिए कुछ नहीं बताया। कीर्ति घर पर आकर अनुराग के दी हुई चीजों को प्यार से देखते हुए सहेज कर रखने लगी। अनुराग के मैसेज का अलग फ़ोल्डर कीर्ति की आँखों और दिल में सिर्फ अनुराग का ही चेहरा था।वो चाहकर भी उसके साथ नहीं रह सकती थी।लेकिन वो उससे दूर भी नहीं रह सकती थी।वो सोचती जो समय मेरे पास बचा है वो सारा समय में अनुराग के साथ बिताऊं। पूरे जीवन की खुशियां इसी पल से जी लूँ।पर वो चाहकर भी ऐसा नहीं कर पा रही थी।क्योंकि वो अनुराग को किसी प्रकार का दुख नहीं देना चाहती थी। उसे डर था कहीं उसके जाने के बाद अनुराग जिंदगी जीना ना भूल जाये। जिससे उसे मरने के बाद भी शांति न मिलती।व अनुराग की यादों को अपने शासन में बरतते हुए अपनी माँ से कहती है।नहीं।अगर मैं सोती रहूँ तो आप अनुराग को मत बुलाना। उसकी माँ ने कीर्ति की आगे पढ़ रही थी, वो समझ गयी थी कि इतनी ऐसा क्यों कह रही है?वो अनुराग से बहुत प्यार करती है।आखिरी के कुछ दिनों में कीर्ति बहुत शांत होगी।ना कोई शिकायत, न जिद, न ही कोई मस्ती।अनुराग को कीर्ति को ऐसे शांत देख कर डर लगने लगा।एक सांप अनुराग कीर्ति से कहता, तुम शांत ओरिया से क्यों देखती हो जैसविदा ले रही हो।कीर्ति मुस्कुरायी  ‘’।तुम कुछ ज्यादा ही सोचते हो।’’ असल में कीर्ति हर मुलाकात को आखरी  समझकर जी रही थी।कीर्ति ने अनुराग का हाथ पकड़ा।कीर्ती के हाथ ठंडे थे।अनुराग ने कहा, तुम्हारे हाथ इतने ठंडे क्यों है? कीर्ति बोली आदत डाल लो।अनुराग हँस दिया। उसे नहीं पता था। कीर्ति  कि इस बात का क्या मतलब है।उसे नहीं पता था कुछ आदतें जिंदगी भर साथ  रहती है।अगले दिन अनुराग को कीरती के बारे में पता लगा।उसे झटका नहीं लगा बस एक लंबी खामोशी आ गई।वो हर रोज़ उसी समय पेंटिंग क्लास होते हुए। उसी रेस्टोरेंट में जाता  जहाँ वो बैठकर चाय पीते और बाते करते थे।अब वहाँ अनुराग अकेले बैठा रहता।उसे कीर्ति की याद नहीं आती थी। उसे वे पर याद आती जब कीर्ती एक पल मेंपूरी जिंदगी जीने की ख्वाहिश करती। ,प्यार वही नज़र से मेरी तरफ देखती रहती ,हर बार उसका मूड कर मुझे देखना।जैसे वह मेरे प्यार को अपने अंदर भर रही हो।उसका प्यार से मुड़कर मेरी तरफ देखना।मुझे लगता है जैसे उसका प्यार मेरे अंदर तक जा रहा हो। उसका आखिरी बार कहना आदत डाल लो।अब भी मुझे महसूस होता है उसका ठंडा हथ मेरे हाथों में।उसकी वो बोलते बोलते लंबीखामोशी?मुझे महसूस होता है कि आज भी वह मेरे साथ है।1 दिन अनुराग कीर्ति के घर गया। जहाँ उसकी माँ अनुराग को कीर्ति का लिखा हुआ लेटर दिया।अनुराग मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, बस मैं अपनी प्यार का ही जा, इसलिए नहीं किया कहीं तुम मेरे प्यार की वजह से रुक जाओ। यह जिंदगी बहुत लंबी और तेजी से आगे बढ़ रही है।मैं तुम्हें दुखी नहीं देखना चाहती थी।फिर भी तुमने मेरी आँखों में प्यार पढ़ ही लिया। मैं चाहती हूँ मेरे जाने के बाद भी तुम अपनी जिंदगी में आगे बढ़ो।तुम खुश रहोगे  तभी मुझे शांति मिलेगी।  कुछ समय बाद अनुराग अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने लगा।पर वो किसी के करीब न जा सके।उसे कीर्ति के ठंडे हाथों के स्पर्श के की आदत हो  चुकी थी।कीर्ति का लेटर पढ़ने के बाद अनुराग रुका नहीं उसने अपने आप को जल्द संभाल लिया।  आज वो एक सक्सेसफुल बिज़नेस मैन है।पर वो किसी से प्यार नहीं कर पाया।जब भी वो किसी लड़की के करीब जाता है, उसे कीर्ति का एहसास महसूस  होता।बस वो किसी और लड़की के करीब ही नहीं जा पाया।कीर्ति का प्यार उसके अंदर तक बस चुका था।और वह कीर्ति को भूल नहीं पा रहा था। वो खु़श रहता है उसके हर एहसास में की थी उसके साथ होती थी। 

 FAQ:-

1. यह कहानी किस बारे में है?

यह कहानी अनुराग और कीर्ति की है, जिनकी दोस्ती प्यार में बदल गई लेकिन कीर्ति की बीमारी ने उन्हें अलग कर दिया।

2. कीर्ति अनुराग से प्यार क्यों नहीं जताना चाहती थी?

कीर्ति को कैंसर था और वह नहीं चाहती थी कि अनुराग उसके दर्द में उलझ जाए या उसकी मौत से टूट जाए।

3. अनुराग को कीर्ति की बीमारी का कब पता चला?

अनुराग को कीर्ति की मौत के बाद उसकी माँ ने एक लेटर दिया जिससे उसे सब कुछ समझ में आ गया।

4. इस कहानी का मुख्य संदेश क्या है?

प्यार सिर्फ पाने का नाम नहीं, बल्कि किसी को उसकी भलाई के लिए छोड़ देने का भी नाम है। और हर मुलाकात को आखिरी समझकर जीना ही सच्चा जीवन है।

5. क्या अनुराग ने आगे जिंदगी में प्यार किया?

नहीं, अनुराग कीर्ति को कभी भूल नहीं पाया। वो एक सफल बिज़नेस मैन बना लेकिन किसी और से प्यार नहीं कर पाया।

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